Saturday, February 8, 2020

कवि

कवि पढ़ लेता है
वह सब भी
जो लिखा ही न गया कभी
कवि सुन लेता है
वह सब भी
जो कहा ही न गया कभी
जी लेता है तमाम अनकहे,
अलिखित,अपठित गद्यांशों में ही
सारी उम्र अपनी 
और एक दिन उन ख़्वाबों को  
कविता की तस्वीर दे 
कर देता है मुक़म्मल 
-प्रीति 'अज्ञात' 

5 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 08 फरवरी 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. कवि संभावनाओं में जीवन तलाशता है.. उसकी दिव्य दृष्टि परिस्थितियों का आकलन करके समाज को अपने विचारों के द्वारा अपने शब्दों के द्वारा कुछ सकारात्मकता और नकारात्मकता के भाव पुट कर के ..सच को प्रदर्शित करती है जो काफी हद तक कभी-कभी समाज का मार्गदर्शन भी कर देती है.।
    आपकी कविताओं में व्यक्त संवेदनाएं सार्थकता का अनुभव कराती है बहुत अच्छा लिखती हैं आप

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  3. जय मां हाटेशवरी.......

    आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
    आप की इस रचना का लिंक भी......
    09/02/2020 रविवार को......
    पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
    शामिल किया गया है.....
    आप भी इस हलचल में. .....
    सादर आमंत्रित है......

    अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
    http s://www.halchalwith5links.blogspot.com
    धन्यवाद

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  4. वाह बहुत खूब,सटीक सुंदर।

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  5. के. पी. अनमोलFebruary 13, 2020 at 3:33 PM

    सच है...कवि सब पढ़-समझ लेता है। अच्छी रचना।

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