Saturday, May 10, 2014

चलो तब ही सही.......


न रहूंगी कभी और घर मेरे तुम आओगे
चलो तब ही सही, वादा तो निभा जाओगे............!

तू नही अजनबी वहाँ होगा
देख तुझको, सारे पंछी चहचहाएँगे
झुकेगी फूलों से लदी हुई हरेक डाली 
पुष्प शरमाएँगे फिर खुद ही बिखर जाएँगे
करेंगी स्वागत तेरा बाग़ की सब तितलियाँ
ओस के पत्तों में, आँखों की नमी पाओगे.
न रहूंगी कभी और घर मेरे तुम आओगे
चलो तब ही सही, वादा तो निभा जाओगे............

खोलना लकड़ी की पुरानी-सी अलमारी को
मिलेगी उसमें छुपी इक वहाँ तस्वीर तेरी
उकेरी थी बहुत सी यादें मगर
उन्हीं में ख़ास ये अमानत है मेरी 
फिर सुनना बैठकर खामोशी को
संग अपना ही गीत गुनगुनाओगे
न रहूंगी कभी और घर मेरे तुम आओगे
चलो तब ही सही, वादा तो निभा जाओगे............!

बैठ सोफे पे पढ़ना फिर वहीं वो डायरी भी
मिलेगा पन्नों में सहमा हुआ सा इक ही ख़्वाब
जो हो सके तो फिर समझ जाना
तेरे हर सवाल का लिखा है, वहीं पर ही जवाब
पलटकर देखना अब पीछे की दीवार पर तुम
मेरी तस्वीर में हंसता मुझे तुम पाओगे
न रहूंगी कभी और घर मेरे तुम आओगे
चलो तब ही सही, वादा तो निभा जाओगे............!

यूँ कहने को तो है अभी भी बसा घर ये मेरा
हरेक शै में है पिघला हुआ बस अक़्स तेरा
न दिखूँगी तुझे पर तू उदास ना होना
मेरी यादों को जीना, साथ उनके मत रोना
निहारोगे जब सोचते से, खुद को दर्पण में
मैं मुस्काऊँगी वहाँ और तुम ही चौंक जाओगे.
न रहूंगी कभी और घर मेरे तुम आओगे
चलो तब ही सही, वादा तो निभा जाओगे............!

बसे हो बन के ज़िंदगी घर की
हाँ, तुम्हीं तो हो जान मेरे इस चमन की
जिसे हो ढूँढते-फिरते, जुदा हुई  ही नहीं
तेरी इन धड़कनों के संग अभी तक है वहीं
जो तलाशोगे उसे यूँ बेतरहा
हर जगह खुद से ही टकराओगे
न रहूंगी कभी और घर मेरे तुम आओगे
चलो तब ही सही, वादा तो निभा जाओगे............!

प्रीति 'अज्ञात'

6 comments:

  1. वाह...ऐसा शब्द कौशल और कहाँ मिलेगा....अद्भुत रचना...बधाई

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  2. धन्यवाद, संजय जी !

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  3. लाजवाब रचना प्रीति आपकी बहुत बधाई

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  4. hridaysparshi rachana .........
    baar baar parhata hoo'n
    khwahisho ke badalo ki .......
    kuchh ankahi kuchh ansuni .....

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    1. शुक्रिया, प्रवीण जी ! आप जैसे पाठकों का मिलना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, मेरे लिए ! कोशिश रहेगी, कि आपकी रूचि बनी रहे ! स्वागत है, आपका !

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