कवि के चले जाने के बाद
शेष रह जाते हैं उसके शब्द
मन के किसी कोने को कुरेदते हुए
चिंघाड़ती हैं भावनाएँ
कवि की बातें, मुलाक़ातें
और उससे जुड़े किस्से
शब्द बन भटकते हैं इधर-उधर
जैसे पुष्प के मुरझाने पर
झुककर उदास हो जाता है वृन्त
जैसे उमस भर-भर मौसम
घोंटता है बादलों का गला
जैसे प्रिय खिलौने के टूट जाने पर
रूठ जाता है बच्चा
या कि बेटे के शहर चले जाने पर
गाँव में झुँझलाती फिरती है माँ
वैसे ही हाल में होते हैं
कुछ बचे हुए लोग
पर जैसे थकाहारा सूरज
साँझ ढले उतर जाता है नदी में
एक दिन अचानक वैसे ही
चला जाता है कवि भी
हाँ, उसके शब्द नहीं मरते कभी
वे जीवित हो उठते हैं प्रतिदिन
खिलती अरुणिमा की तरह
- प्रीति 'अज्ञात'
(Image: Gavin Trafford)
शेष रह जाते हैं उसके शब्द
मन के किसी कोने को कुरेदते हुए
चिंघाड़ती हैं भावनाएँ
कवि की बातें, मुलाक़ातें
और उससे जुड़े किस्से
शब्द बन भटकते हैं इधर-उधर
जैसे पुष्प के मुरझाने पर
झुककर उदास हो जाता है वृन्त
जैसे उमस भर-भर मौसम
घोंटता है बादलों का गला
जैसे प्रिय खिलौने के टूट जाने पर
रूठ जाता है बच्चा
या कि बेटे के शहर चले जाने पर
गाँव में झुँझलाती फिरती है माँ
वैसे ही हाल में होते हैं
कुछ बचे हुए लोग
पर जैसे थकाहारा सूरज
साँझ ढले उतर जाता है नदी में
एक दिन अचानक वैसे ही
चला जाता है कवि भी
हाँ, उसके शब्द नहीं मरते कभी
वे जीवित हो उठते हैं प्रतिदिन
खिलती अरुणिमा की तरह
- प्रीति 'अज्ञात'
(Image: Gavin Trafford)