Monday, June 16, 2014

एक टुकड़ा ज़िंदगी...

एक टुकड़ा ज़िंदगी
अपनों से ही
होती रही भ्रमित
खोती रही
जीवन के मायने.
बदलते चले गये
श्वासों के अर्थ
ग़लत हुआ हर गणित.
शब्दों के पीछे छुपा मर्म
कोसता रहा अपने होने को
कौन पढ़ पाया
अहसासों और हृदय के
उस एकाकी कोने को ?

सबने चुन लीं
अपने-अपने हिस्से
की खुशियाँ
मुट्ठी भर मुस्कानें
समेटीं दोनों हाथों से
भरी रिक्तता स्वयं की
संवार ली अपनी दुनिया.

दर्द, आँसू सर झुकाए
अब भी तिरस्कृत
शून्य के चारों तरफ
निराश, हताश भटकते.
बंज़र ज़मीन पर
चीत्कारें भरता मन
सुन रहा है अट्टहास
बदली हुई दृष्टियों का
भिक्षुक बना प्रेम
स्मृतियाँ बनीं सौत
एक टुकड़ा ज़िंदगी
पल-पल बरसती मौत !

प्रीति 'अज्ञात'

23 comments:

  1. .....संवेदनशील पंक्तियाँ :))

    ............. अनुपम भाव संयोजन

    Recent Post शब्दों की मुस्कराहट पर ….अब आंगन में फुदकती गौरैया नजर नहीं आती

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  2. . सच एक टुकड़ा ही तो जिंदगी...
    बहुत संवेदनशील रचना।

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  3. बहुत सुन्दर एवं भावपूर्ण रचना .. :)

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  4. बहुत-बहुत धन्यवाद, संजय जी, कविता जी, सुशील कुमार जी, नीरज जी ! आप सभी का स्वागत एवं आभार :)

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  5. बहुत सुन्दर नज़्म. ज़िन्दगी के डाइमेंशन्स को बयान करते हुए .
    बधाई स्वीकार करे और आपका आभार !
    कृपया मेरे ब्लोग्स पर आपका स्वागत है . आईये और अपनी बहुमूल्य राय से हमें अनुग्रहित करे.

    कविताओ के मन से

    कहानियो के मन से

    बस यूँ ही



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    1. धन्यवाद, विजय जी !

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  6. एक टुकड़ा जिंदगी भी कई बार सालों लम्बी हो जाती है जब गुज़रती नहीं ...
    गहरा एहसास लिए है रचना ...

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    1. बहुत-बहुत आभार आपका :)

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  7. शब्दों के पीछे छिपा मर्म
    कोसता रहा अपने होने को
    कौन पढ़ पाया
    एहसासों और ह्रदय के
    उस एकाकी कोने को .....वाह प्रीती ...शब्द नहीं मेरे पास .....कितनी पीड़ा ..!!!!

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    1. शुक्रिया, सरस जी :) आती रहें यूँ ही..अच्छा लगता है !

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  8. कल 27/जून/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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    1. शुक्रिया, यशवंत जी ! :)

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  9. बहुत सुन्दर भाव !
    मेरे ब्लॉग को भी फोलो करे ,ख़ुशी होगी !
    उम्मीदों की डोली !

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    1. धन्यवाद सर ! आज ही आपका ब्लॉग भी फॉलो किया :) बेहतरीन लगा !

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  10. बहुत खूबसूरत रचना

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    1. शुक्रिया, अनुषा :)

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  11. मन को छू गई आपकी रचना। बहुत ही ख़ूबसूरती से आपने शब्दों को पिरोया है

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    1. शुक्रिया, स्मिता :)

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  12. मन के झंझावात का एक चमत्कारिक प्रभाव वाला शब्द चित्र

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद, अरविंद जी !

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  13. टुकड़ो में जिंदगी.... नहीं .........टुकड़े में जिंदगी देखने का अद्भुत प्रयास....... बहुत सुन्दर रचना

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    1. आभार, कौशल लाल जी !

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