ख़्वाहिशों के बादलों की.......कुछ अनकही...कुछ अनसुनी...

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Sunday, September 30, 2018

पहचानती हूँ

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चाल से, अंदाज़ से हर रंग इनका जानती हूँ  रिश्तों के इन गिरगिटों को ख़ूब मैं पहचानती हूँ  मंदिरो-मस्ज़िद में जाता जानकर मैं क्या करूँ  आदमी...
Thursday, September 20, 2018

चले जाने के बाद

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कवि के चले जाने के बाद  शेष रह जाते हैं उसके शब्द मन के किसी कोने को कुरेदते हुए  चिंघाड़ती हैं भावनाएँ  कवि की बातें, मुलाक़ातें  और उस...
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Tuesday, July 24, 2018

हे राम!

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राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट  जो बंदा मन की करे उसे पकड़कर कूट  उसे पकड़कर कूट तू ऐसा मानवता शरमाये  थर-थर बोलें लोग यही हाय नंबर न ल...
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रामराज्य

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आसाराम करें आराम, जय श्री राम, जय श्री राम राम-रहीम बिगाड़ें काम, जय श्री राम, जय श्री राम  राधे माँ छलकते जाम, जय श्री राम, जय श्री राम ...
Saturday, July 21, 2018

सब बढ़िया है

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तुम्हारी हँसी  जीवन की उस तस्वीर जैसी है  जिसमें उम्र के तमाम अनुभव  होठों पर जमकर खिलखिलाते हैं  और फिर हँसते-हँसते अनायास ही  मौन हो...
Wednesday, July 4, 2018

प्रतीक्षा

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मृत्यु एक शाश्वत सत्य है जो घटित होते ही रोप देता है  दुःख के तमाम बीज   स्मृतियों की अनवरत आवाजाही के मध्यांतर में  पनपती हैं चहकती सै...
Thursday, May 10, 2018

यूँ ही ...

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चलो इस तरह भी जिया जाए  ख़्वाब को साथ न लिया जाए  ग़म की औक़ात कुछ नहीं रहती  घूँट तबस्सुम से जो पिया जाए  अपनी ख़ातिर ही जीना क्या जीना ...
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Preeti 'Agyaat'
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